सोचने की बात है कि हमारे शरीर में उपस्थित हार्ट अपने आप धड़कता है और फेफड़े अपने आप सांस लेते हैं शरीर के सभी अंगों में हमारी इच्छा का कोई लेना-देना नहीं यह सारी कायनात प्रोग्राम्ड अर्थात ईश्वर ने सब कुछ पूर्व निर्धारित करने के पश्चात ही हमें जन्म दिया जो कुछ हमारे भाग्य में नहीं है उसे हम किसी कीमत पर कर नहीं सकते जो कुछ हम कर रहे हैं वह सब ईश्वर की मर्जी से ही कर रहे हैं और हमें ऐसा लगता है कि हमारे कर्मों से हम काम कर पाते हैं जबकि ऐसा है नहीं करता तो सिर्फ ईश्वर ही है हमें ऐसा प्रतीत होता है की कर्म से भाग्य का निर्धारण होता है लेकिन ऐसा नहीं है भाग्य ही कर्म को निर्धारित करता है यही अंतिम सत्य है जिसको कि हम विज्ञान के माध्यम से भी सिद्ध कर सकते हैं।