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Shloka of the Day

Shloka of the Day

देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं
व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् ।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥१॥

अर्थ:
जिनके पवित्र चरण- कमल की सेवा देवराज इन्द्र सदा करते रहते हैं तथा जिन्होंने शिरोभूषण के रूप में चन्द्रमा और सर्प का यज्ञोपवीत धारण किया है। जो दिगम्बर-वेश में हैं एवं नारद आदि योगियों का समूह जिनकी वन्दना करता रहता है, ऐसे काशी नगरी के स्वामी कृपालु काल भैरव की मैं आराधना करता हूँ।

यह श्लोक हमें स्मरण कराता है कि भैरव केवल भय का प्रतीक नहीं, बल्कि वे समय, न्याय और करुणा के स्वामी हैं। उनके चरणों की शरण में आने वाला व्यक्ति सभी प्रकार के भय, बाधा और पाप से मुक्त हो जाता है।

Source: श्री काल भैरव अष्टकम