Shloka of the Day
Shloka of the Day
हरि अनंत हरि कथा अनंता।
कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता ॥
रामचंद्र के चरित सुहाए।
कलप कोटि लगि जाहिं न गाए॥
अर्थात:
भगवान का स्वरूप, उनकी महिमा, उनकी शक्ति की कोई सीमा नहीं है। भगवान की लीलाएँ, उनके चरित्र, उनकी कृपा की कहानियाँ भी अनगिनत हैं। संतजन इन कथाओं को अनेक प्रकार से कहते और सुनते हैं, फिर भी वे पूरी नहीं होतीं। श्रीराम के सुंदर चरित्र इतने विशाल और दिव्य हैं कि यदि कोई करोड़ों कल्पों तक भी उनका गान करे, तो भी वे पूर्ण नहीं हो सकते।
भगवान सीमित बुद्धि से परे हैं। जितना अधिक उनका स्मरण और कीर्तन किया जाए, उतना ही आनंद बढ़ता जाता है। रामकथा केवल कहानी नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने का साधन है। दिव्य चरित्र का रस कभी समाप्त नहीं होता।
Source: श्रीरामचरितमानस


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