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Shloka of the Day

Shloka of the Day

सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम् ।
एतद् विद्यात् समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः ॥

अर्थात:
जो चीजें दूसरों पर निर्भर होती हैं, उनमें दुःख मिलता है। और जो चीजें अपने नियंत्रण में होती हैं, उनमें सुख मिलता है। संक्षेप में, यही सुख और दुःख का मूल लक्षण है।

मनुष्य तब दुखी होता है जब वह बाहरी परिस्थितियों, लोगों, वस्तुओं, सम्मान, प्रशंसा, सुविधा जैसी चीजों पर निर्भर होकर जीता है। लेकिन जब वह स्वयं पर नियंत्रण रखना सीखता है। अपने विचारों पर, इच्छाओं पर, क्रोध पर, अपेक्षाओं पर तब जीवन में शांति और सुख स्वतः अनुभव होने लगता है।

सार यह कि —
निर्भरता दुःख की जड़ है, और आत्मनियंत्रण सुख का मार्ग।

Source: मनुस्मृति