हम अपने कर्म से अज्ञान से लोभ से जो कर्म करते उससे ही तोह मुश्किले अति है.. धर्म,प्रेम , नीती से कर्म करेंगे और लोभ ईर्षा को दूर रखेंगे तोह मुश्किले अपने आप ही दूर हो जायेगी.. पर सत्संग और सद्गुरू कि शरण मिले तो अंधाकर मिटकर आनंद सुख और शांती भी आ जायेगी.