महा इंद्रजाल हिंदी में
भारतीय लोक-परंपराओं में मंत्र, यंत्र और तांत्रिक ग्रंथों का उल्लेख लंबे समय से मिलता रहा है। इन्हीं विषयों से जुड़ी पुस्तकों में “महा इंद्रजाल (Maha Indrajal in Hindi)” या “इंद्रजाल” नाम से प्रचलित पुस्तकें भी पाठकों में काफी जिज्ञासा पैदा करती हैं। ऐसी पुस्तकों में अलग-अलग प्रकार के यंत्र, मंत्र, पारंपरिक प्रयोग और उनसे संबंधित विधियों का संग्रह देखने को मिलता है।
इस लेख में हम उपलब्ध महा इंद्रजाल पुस्तक के आधार पर समझेंगे कि इसमें किस प्रकार की सामग्री दी गई है, यंत्रों को किस प्रकार प्रस्तुत किया गया है और इस तरह के ग्रंथों को पढ़ते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
महा इंद्रजाल (Maha Indrajal in Hindi) मुख्य रूप से मंत्र-यंत्र और विभिन्न परंपरागत प्रयोगों से संबंधित सामग्री का संकलन दिखाई देता है। पुस्तक के शुरुआती भाग में ही अनेक प्रकार के यंत्रों का वर्णन मिलता है। इनमें कुछ यंत्र ग्रहों से संबंधित हैं तो कुछ धन, आकर्षण, यात्रा, शत्रु आदि विषयों से जोड़े गए हैं।
पुस्तक में केवल यंत्रों की आकृति ही नहीं दी गई, बल्कि कई स्थानों पर यह भी बताया गया है कि संबंधित यंत्र को किस सामग्री पर लिखना है, किस प्रकार की कलम या पदार्थ का उल्लेख किया गया है तथा पुस्तक के अनुसार उसका क्या फल माना गया है।
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उदाहरण के लिए शुरुआती पृष्ठों में पंचग्रह के यंत्र तथा उनसे संबंधित विवरण देखने को मिलता है। पुस्तक में इन्हें अलग-अलग वर्गों और अंकों के माध्यम से दर्शाया गया है। साथ ही कुछ स्थानों पर राशियों से संबंधित यंत्रों का उल्लेख भी दिखाई देता है।
इस पुस्तक की सबसे प्रमुख विशेषताओं में विभिन्न प्रकार के यंत्रों की बड़ी संख्या है। यंत्र सामान्यतः किसी विशेष ज्यामितीय आकृति, अंक, अक्षर, बीजाक्षर अथवा मंत्र से निर्मित चित्र के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं। महा इंद्रजाल में भी अनेक यंत्र वर्गाकार, वृत्ताकार, त्रिकोणात्मक और अन्य ज्यामितीय आकृतियों में दिखाई देते हैं।
पुस्तक के शुरुआती पृष्ठों में ही शत्रुनाशक यंत्र का उल्लेख मिलता है। उसके साथ पुस्तक एक विशिष्ट लेखन और प्रयोग-विधि का दावा भी प्रस्तुत करती है।
इसी प्रकार आगे व्याघ्र आदि से बचाव का यंत्र दिया गया है। पुस्तक के अनुसार इसका संबंध जंगल में सिंह, व्याघ्र आदि हिंसक पशुओं से सुरक्षा की मान्यता से जोड़ा गया है।
इससे पता चलता है कि पुस्तक में यंत्रों को केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि तत्कालीन लोक-मान्यताओं के अनुसार जीवन की विभिन्न समस्याओं से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।
महा इंद्रजाल (Maha Indrajal in Hindi) में वशीकरण शीर्षक से भी अनेक यंत्र और विधियाँ मिलती हैं। एक स्थान पर स्पष्ट रूप से “वशीकरण यंत्र” शीर्षक दिया गया है और उसके साथ यंत्र की आकृति तथा कथित प्रयोग-विधि लिखी हुई है। पुस्तक में इसके अतिरिक्त स्त्री वशीकरण यंत्र, पति वशीकरण यंत्र और राजा के क्रोध को शांत करने का यंत्र जैसे शीर्षक भी दिखाई देते हैं।
यहाँ यह समझना जरूरी है कि ये पुस्तक में वर्णित पारंपरिक दावे हैं। किसी व्यक्ति की इच्छा या सहमति को प्रभावित करने के उद्देश्य से वास्तविक जीवन में ऐसे प्रयोग करना नैतिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाना चाहिए।
इंद्रजाल पुस्तक में शत्रु से संबंधित कई प्रकार के यंत्रों का वर्णन भी मिलता है। शुरुआती हिस्से में शत्रुनाशक यंत्र के अलावा आगे मुख स्तम्भन यंत्र जैसे शीर्षक भी दिखाई देते हैं। पुस्तक इन यंत्रों के लिए अलग-अलग सामग्री, पूजा और प्रयोग की विधियों का दावा करती है।
इसी तरह कुछ यंत्रों में विशेष व्यक्तियों या परिस्थितियों को प्रभावित करने की बात कही गई है। आज के संदर्भ में ऐसी सामग्री को किसी व्यक्ति को हानि पहुँचाने की व्यावहारिक विधि के रूप में नहीं, बल्कि पुस्तक में संरक्षित पुराने विश्वासों के उदाहरण के रूप में पढ़ना चाहिए।
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महा इंद्रजाल मंत्र, यंत्र और विभिन्न परंपरागत प्रयोगों से जुड़ी सामग्री का एक विस्तृत संग्रह है। उपलब्ध पुस्तक के शुरुआती हिस्से में ही पंचग्रह से जुड़े यंत्रों से लेकर आकर्षण, वशीकरण, शत्रु, यात्रा, रोग तथा अन्य उद्देश्यों से संबंधित अनेक यंत्र देखने को मिलते हैं।
हालाँकि इसके कई प्रयोग ऐसे परिणामों का दावा करते हैं जिन्हें आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर सत्यापित नहीं माना जा सकता। इसलिए इस पुस्तक को अंधविश्वास या भय की दृष्टि से देखने के बजाय भारतीय लोक-परंपरा और पुराने यंत्र-मंत्र साहित्य को समझने वाली सामग्री के रूप में पढ़ना बेहतर है।

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