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Shloka of the Day

Shloka of the Day

न सत्यं दानमानौ वा न यज्ञाश्चाप्तदक्षिणाः।
तथा बलकराः सीते ! यथा सेवा पितुर्हिता ॥

भावार्थ:
श्रीराम देवी सीता से कह रहे हैं,
हे सीता! पिता की सेवा (पितृसेवा) जो कल्याणकारी और श्रेष्ठ कर्म माना गया है, उसकी महिमा इतनी अधिक है कि न केवल सत्य बोलना, दान देना, यज्ञ करना, यज्ञ में दक्षिणा देना, बल्कि सभी प्रबल साधन भी उसके समान नहीं माने जाते।

यानी, पितृसेवा ही सर्वोत्तम साधन और पुण्य का मार्ग है।

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Source: वाल्मीकि रामायण - अयोध्या काण्ड
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