Shloka of the Day
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श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्॥
अर्थ:
हे मन! करुणामय श्रीराम का भजन कर। वे संसार के भयानक भय और दुःखों को हरने वाले हैं। उनकी आँखें नवखिले कमल जैसी हैं, मुख और हाथ कमल के समान हैं, और उनके चरण लाल कमल की भाँति शोभायमान हैं।
तुलसीदास जी केवल भगवान श्रीराम के सौंदर्य का वर्णन नहीं करते, बल्कि यह बताते हैं कि जब मन श्रीराम में लग जाता है, तब जन्म-मृत्यु, दुःख, भय और असुरक्षा स्वतः समाप्त हो जाते हैं। यह श्लोक मन को डर से भक्ति की ओर मोड़ने का आह्वान है।
Source: श्री राम स्तुति


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