गंगा स्तोत्र हिंदी में
गंगा स्तोत्र (Ganga Stotra in Hindi) भारतीय सनातन परंपरा का एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र संग्रह है, जो माँ गंगा की महिमा, करुणा और मोक्षदायिनी शक्ति का वर्णन करता है। माँ गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि जीवों को पापों से मुक्त करने वाली देवी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, उनके स्मरण मात्र से भी मन, शरीर और आत्मा शुद्ध हो जाती है।
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गंगा स्तोत्र संग्रह एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक ग्रंथ है, जिसमें माँ गंगा की स्तुति से जुड़े अनेक प्रसिद्ध और प्रभावशाली स्तोत्रों को एक ही स्थान पर संकलित किया गया है। माँ गंगा को सनातन धर्म में मोक्षदायिनी, पापनाशिनी और करुणामयी देवी के रूप में पूजा जाता है। यह पुस्तक भक्तों को माँ गंगा की दिव्य चेतना से जोड़ने का एक अनुपम माध्यम है।
इस संग्रह में निम्नलिखित प्रमुख स्तोत्र सम्मिलित हैं:
1.गंगा स्तोत्र
गंगा स्तोत्र माँ गंगा की पवित्रता, उद्धारक शक्ति और करुणामयी स्वरूप का विस्तार से वर्णन करता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्त के जीवन से पाप, क्लेश और मानसिक अशांति दूर होती है। यह स्तोत्र गंगा स्नान, नित्य पूजा और विशेष पर्वों पर अत्यंत फलदायी माना गया है।
2. श्रीगङ्गाष्टकम्
श्रीगङ्गाष्टकम् आठ श्लोकों में माँ गंगा की महिमा को संक्षिप्त किंतु अत्यंत प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करता है। यह स्तोत्र उन भक्तों के लिए विशेष है जो कम समय में गहन आध्यात्मिक अनुभूति चाहते हैं। इसका नियमित पाठ मन को स्थिर करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
3. गङ्गालहरी
गङ्गालहरी एक भावपूर्ण स्तोत्र है, जिसमें भक्त का हृदय माँ गंगा के प्रति प्रेम, समर्पण और श्रद्धा से भर उठता है। इस स्तोत्र का पाठ करते समय ऐसा अनुभव होता है मानो माँ गंगा स्वयं अपने भक्त के दुखों को हर लेती हों। यह स्तोत्र विशेष रूप से मानसिक शांति और भक्ति की गहराई के लिए जाना जाता है।
4. महर्षि वाल्मीकि विरचित श्रीगङ्गाष्टकम्
आदिकवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित यह श्रीगङ्गाष्टकम् इस पुस्तक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। वाल्मीकि जी द्वारा वर्णित माँ गंगा का स्वरूप अत्यंत शास्त्रीय, पवित्र और आध्यात्मिक है। इस स्तोत्र में गंगा को मोक्षदायिनी, लोककल्याणकारी और करुणामयी देवी के रूप में नमन किया गया है।
5. श्रीगंगामहिमाष्टकम्
श्रीगंगामहिमाष्टकम् माँ गंगा की अलौकिक महिमा, उनके चमत्कार और संसार के जीवों पर उनकी कृपा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र हमें स्मरण कराता है कि माँ गंगा केवल पाप हरने वाली ही नहीं, बल्कि भक्तों को जीवन के कष्टों से उबारने वाली दिव्य शक्ति भी हैं।
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शास्त्रों में कहा गया है कि गंगा का उद्गम स्वर्गलोक से हुआ और वे भगवान शिव की जटाओं से होकर पृथ्वी पर अवतरित हुईं। इसीलिए उन्हें त्रिपथगामिनी कहा जाता है—स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में प्रवाहित होने वाली देवी।
माँ गंगा का जल न केवल बाह्य शुद्धि करता है, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा को भी पवित्र करता है। यही कारण है कि जन्म से लेकर मृत्यु तक, हर संस्कार में गंगा का विशेष महत्व है। इस पुस्तक में संकलित स्तोत्र हमें माँ गंगा के इसी दिव्य स्वरूप का अनुभव कराते हैं।
गंगा स्तोत्र संग्रह (Ganga Stotra in Hindi) केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि माँ गंगा की कृपा से जुड़ने का एक दिव्य माध्यम है। यह ग्रंथ हमें सिखाता है कि बाहरी शुद्धि के साथ-साथ आत्मिक शुद्धि भी जीवन के लिए आवश्यक है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ इस पुस्तक का पाठ करता है, उसके जीवन में शांति, पुण्य और आध्यात्मिक प्रकाश अवश्य आता है।


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