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गीतावली हिंदी में

श्री तुलसीदासजी के ग्रन्थों की दृष्टि से रामचरितमानस के पश्चात् दूसरा नंबर गीतावली (Gitavali in Hindi) का ही है। इसमें सम्पूर्ण रामचरित पदो में वर्णन किया गया है। परन्तु रामायण की अपेक्षा इसकी वर्णन शैली कुछ दूसरे ही ढंग की है। रामायण महाकाव्य है, उसमें सभी रसों का संपूर्ण जानकारी गई है; वहाँ कवि हृदय के सभी भावों का गम्भीर विश्लेषण देखने में आता है। परन्तु गीतावली में आरम्भ से लेकर अन्त तक कवि का एक ही भाव दिखायी देता है; वह कथानक के क्रम की अपेक्षा न कर के अपने इष्टदेव की मधुर झाँकी करने में ही जुड़ा हुआ है।

गीतावली गोस्वामी तुलसीदासजी की एक महत्वपूर्ण काव्य रचना है। गीतावली तुलसीदासजी की निश्चित रचनाओं में से एक मानी जाती है। यह रचना तुलसीदासजी द्वारा ब्रजभाषा में रचित गीतों वाली रचना है जिसमें भगवान श्री राम के चरित की कुछ घटनाएँ, झाँकियाँ, मार्मिक भावबिन्दु, ललित रस स्थल, करुणदशा आदि वर्णन किया गया है। गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा गीतावली की रचना सात खण्डों में विभक्त की है। इस काण्डों में कथा का विभाजन लगभग इस प्रकार हुआ है, जैसे ‘रामचरितमानस’ में हुआ है।

गीतावली(Gitavali in Hindi) में भगवान श्री राम की बाललीला, भरत मिलाप, जटायु-उद्धार, विभीषण-शरणागति, सीताजीकी वियोग-व्यथा, आदि अत्यंत सुंदर और करुण भावों का बहुत ही स्पष्ट और ह्रदयस्पर्शी वर्णन मिलता है। बालकाण्ड के आरम्भ में भगवान के बालरूप का, अन्तमें जनकपुर में स्त्रियों द्वारा उनकी किशोरमूर्ति का, अयोध्याकाण्ड में ग्रामीण स्त्रियों द्वारा प्रभु के तापसवेष का तथा उत्तरकाण्ड में उनके राजवेष का बड़ा ही अनूठा नख-शिख-वर्णन किया है।

इसमें ब्रजभाषा काव्यभाषा के रूप में ही सम्मिलित है परंतु यह कहा जा सकता है कि गीतावली की भाषा सर्वनाम और क्रियापदों को छोड़कर लगभग अवधीभाषा ही है। यह रचना उनकी अन्य महाकाव्य रचनाओं की तरह ही आदर्श और साहित्यिक महत्व की एक श्रेष्ठ चित्र है।

गीतावली में ब्रजभाषा का प्रयोग भक्ति और प्रेम के भावों को व्यक्त करने के लिए हुआ है। गोस्वामी तुलसीदास ने इसमें रामचरितमानस की कहानी के संबंधित भागों का संक्षेप भी किया है। गीतावली के गीतों में राम भक्ति, प्रेम, विनम्रता, ध्यान, और सेवा के भाव प्रमुख हैं। यह भक्ति रस की अद्वितीयता के साथ भरा हुआ है और यह उन्हें भगवान के प्रति अद्वितीय प्रेम में लीन करता है।

गीतावली(Gitavali in Hindi) एक अद्वितीय धार्मिक और साहित्यिक ग्रंथ है जो तुलसीदास के भक्ति और उनके साहित्य कौशल को प्रकट करता है। इसमें रचनात्मकता, भक्ति और सरलता के साथ भारतीय साहित्य के उच्चतम आदर्शों का समर्थन किया जाता है।

 

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