Surya Dwadash Naam Stotram

सूर्य द्वादश नाम स्तोत्रम् — अर्थ, महत्त्व और लाभ
सूर्य द्वादश नाम स्तोत्रम् (Surya Dwadash Naam Stotram) भारतीय सनातन परंपरा का एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसमें Surya भगवान के बारह दिव्य नामों का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र न केवल आध्यात्मिक उन्नति का साधन है, बल्कि स्वास्थ्य, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का भी स्रोत माना जाता है। वैदिक परंपरा में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है, क्योंकि वे प्रतिदिन हमारे समक्ष प्रकट होते हैं और समस्त सृष्टि को जीवन प्रदान करते हैं। इसलिए सूर्य उपासना को धर्म, विज्ञान और जीवनशैली — तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना गया है।
यहां एक क्लिक में पढ़ें ~ श्री सूर्य चालीसा
वैदिक ग्रंथों में सूर्य को सत्य, प्रकाश और चेतना का प्रतीक बताया गया है। वे अज्ञानरूपी अंधकार को दूर करने वाले ज्ञानस्वरूप हैं। ऋग्वेद में सूर्य की अनेक स्तुतियाँ मिलती हैं, जिनमें उन्हें सृष्टि का प्रेरक और पालनकर्ता कहा गया है। भारतीय दर्शन के अनुसार सूर्य आत्मा के भी प्रतीक हैं, जैसे सूर्य बिना भेदभाव सबको प्रकाश देता है, वैसे ही आत्मा भी सबमें समान रूप से विद्यमान है। इस आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सूर्य द्वादश नाम स्तोत्रम् केवल नामों का संग्रह नहीं, बल्कि गहन दार्शनिक संदेश समाहित करता है।
सूर्य द्वादश नाम स्तोत्रम् (Surya Dwadash Naam Stotram) में वर्णित बारह नाम सूर्य के विभिन्न गुणों और शक्तियों को प्रकट करते हैं। “आदित्य” उनका दिव्य उद्गम दर्शाता है, “दिवाकर” दिन के निर्माता के रूप में उनकी भूमिका बताता है, “भास्कर” उनके प्रकाशमय स्वरूप को प्रकट करता है, और “सहस्रांशु” उनके अनंत किरणों वाले तेज का संकेत देता है। प्रत्येक नाम साधक को सूर्य के किसी विशिष्ट गुण से जोड़ता है और जीवन में उन गुणों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
शास्त्रों के अनुसार प्रातःकाल इन नामों का जप अत्यंत फलदायी माना गया है। सूर्योदय के समय वातावरण शुद्ध और ऊर्जा से परिपूर्ण होता है, जिससे मंत्रोच्चारण का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। नियमित पाठ से मन में स्थिरता, विचारों में स्पष्टता और जीवन में अनुशासन आता है। यही कारण है कि सूर्य उपासना को दैनिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण भाग माना गया है।
यहां एक क्लिक में पढ़ें ~ आदित्य हृदय स्तोत्र हिंदी में
सूर्य द्वादश नाम स्तोत्रम् | Surya Dwadash Naam Stotram
॥ सूर्य अर्ध्य मंत्र ॥
एहि सूर्य ! सहस्त्रांशो! तेजोराशे ! जगत्पते !
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर !
अर्थात:
हे सहस्त्र किरणों वाले सूर्यदेव! हे प्रकाश के भंडार और जगत के स्वामी! मुझ पर कृपा करें और मेरी भक्ति से अर्पित यह अर्घ्य स्वीकार करें।
यह मंत्र प्रातःकाल सूर्य को जल अर्पित करते समय बोला जाता है।
॥ स्तोत्र ॥
॥ ॐ सवित्रे सूर्यनारायणाय नमः ॥
आदित्यः प्रथमं नाम द्वितीयं तु दिवाकरः ।
तृतीयं भास्करः प्रोक्तं चतुर्थम् तु मालाबाः ॥
पंचमं तु सहस्रांशुः षष्ठं त्रैलोक्यलोचनः।
सप्तमं हरिदश्वश्च अष्टमं च विभावसुः ॥
नवमं दिनकरं प्रोक्तो दशमं द्वादशात्मिकः ।
एकादशं त्रयोमूर्तिः द्वादशं सूर्य एव च ॥
द्वादशैतानि नामानि प्रातःकाले पठेन्नरः ।
दुःस्वप्ननाशनं सद्यः सर्वसिद्धिः प्रजायते ॥
आयुरारोग्यमैश्वर्य पुत्र-पौत्र प्रवर्धनम ।
ऐहिकामुष्मिकादीनि लभन्ते नात्र संशयः ॥
॥ इति सूर्यद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
॥ नामावली ॥
ॐ मित्राय नमः
ॐॐ रवये नमः
ॐ सूर्याय नमः
ॐ भानवे नमः
ॐ खगाय नमः
ॐ पूष्णे नमः
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
ॐ मरीचये नमः
ॐ आदित्याय नमः
ॐ सवित्रे नमः
ॐ अर्काय नमः
ॐ भास्कराय नमः


Download the Mahakavya App