loader image

Batuk Bhairav Stotra in Hindi

blog
Batuk Bhairav Stotra in Hindi

श्री बटुक भैरव स्तोत्र | Batuk Bhairav Stotra in Hindi

बटुक भैरव स्तोत्र (Batuk Bhairav Stotra) भगवान बटुक भैरव को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है, जो भगवान शिव का उग्र स्वरूप स्वरूप है। बटुक भैरव सुरक्षा, शत्रुओं के विनाश और बुरी शक्तियों के विनाश से जुड़े देवता हैं। यह स्तोत्र का पाठ बटुक भैरव के आशीर्वाद प्राप्त करने की लिए किया जाता है। बटुक भैरव स्तोत्र पाठ बाधाओं को दूर करने, भय को दूर करने के लिए किया जाता है।

भगवत गीता से अपनी समस्याओं का समाधान खोजें

बटुक भैरव को अक्सर एक युवा लड़के के रूप में चित्रित किया जाता है, जिसका रंग सांवला होता है, जो बाघ की खाल पहनता है और सांपों से सुसज्जित होता है। उन्हें आम तौर पर एक हर्षित और चंचल आचरण में चित्रित किया गया है, फिर भी उनके पास अपार शक्ति है। भक्त साहस, शक्ति और बुरी ताकतों से सुरक्षा पाने के लिए उनकी पूजा करते हैं।

बटुक भैरव स्तोत्र (Batuk Bhairav Stotra) संस्कृत में रचा गया है और इसमें भगवान बटुक भैरव की विशेषताओं और शक्तियों की प्रशंसा करने वाले छंद शामिल हैं। ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र को भक्ति और श्रद्धा से पढ़ने से भक्तों को धार्मिक और आध्यात्मिक विकास प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।

यहां एक क्लिक में पढ़ें ~ श्री काल भैरव अष्टकम 

स्तोत्र का पाठ अक्सर भैरव पूजा अनुष्ठानों के एक भाग के रूप में या भगवान बटुक भैरव का आशीर्वाद और कृपा चाहने वाले भक्तों द्वारा दैनिक अभ्यास के रूप में किया जाता है। यह भी माना जाता है कि इसमें बुरे प्रभावों को दूर करने और भक्त को नुकसान से बचाने की शक्ति है।

बटुक भैरव स्तोत्र (Batuk Bhairav Stotra) जीवन में सभी बाधाओं को दूर करने के लिए भैरव देवता की पूजा का बहुत महत्व है। यदि आप बटुक भैरव की वाणी का पाठ करते हैं, खासकर यदि आप अष्टमी के दिन या शनिवार को भैरव अष्टमी का पाठ कर रहे हैं, तो आप निश्चित रूप से अपने सभी कार्यों को सफल और सार्थक बनाने में सक्षम होंगे।

श्री बटुक भैरव स्तोत्र | Batuk Bhairav Stotra

ध्यान

वन्दे बालं स्फटिक-सदृशम्, कुन्तलोल्लासि-वक्त्रम्।
दिव्याकल्पैर्नव-मणि-मयैः, किंकिणी-नूपुराढ्यैः॥

दीप्ताकारं विशद-वदनं, सुप्रसन्नं त्रि-नेत्रम्।
हस्ताब्जाभ्यां बटुकमनिशं, शूल-दण्डौ दधानम्॥

 

मानस-पूजन

उक्त प्रकार ‘ध्यान’ करने के बाद,श्रीबटुक-भैरव का मानसिक पूजन करे-
ॐ लं पृथ्वी-तत्त्वात्मकं गन्धं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।

ॐ हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः
ॐ यं वायु-तत्त्वात्मकं धूपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये घ्रापयामि नमः।

ॐ रं अग्नि-तत्त्वात्मकं दीपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये निवेदयामि नमः।
ॐ सं सर्व-तत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।

यहां एक क्लिक में पढ़ें ~ महामृत्युंजय मंत्र जप विधि

मूल-स्तोत्र

ॐ भैरवो भूत-नाथश्च, भूतात्मा भूत-भावनः।
क्षेत्रज्ञः क्षेत्र-पालश्च, क्षेत्रदः क्षत्रियो विराट् ॥1॥

श्मशान-वासी मांसाशी, खर्पराशी स्मरान्त-कृत्।
रक्तपः पानपः सिद्धः, सिद्धिदः सिद्धि-सेवितः ॥2॥

कंकालः कालः-शमनः, कला-काष्ठा-तनुः कविः।
त्रि-नेत्रो बहु-नेत्रश्च, तथा पिंगल-लोचनः ॥3॥

शूल-पाणिः खड्ग-पाणिः, कंकाली धूम्र-लोचनः।
अभीरुर्भैरवी-नाथो, भूतपो योगिनी-पतिः ॥4॥

धनदोऽधन-हारी च, धन-वान् प्रतिभागवान्।
नागहारो नागकेशो, व्योमकेशः कपाल-भृत् ॥5॥

कालः कपालमाली च, कमनीयः कलानिधिः।
त्रि-नेत्रो ज्वलन्नेत्रस्त्रि-शिखी च त्रि-लोक-भृत् ॥6॥

त्रिवृत्त-तनयो डिम्भः शान्तः शान्त-जन-प्रिय।
बटुको बटु-वेषश्च, खट्वांग-वर-धारकः ॥7॥

भूताध्यक्षः पशुपतिर्भिक्षुकः परिचारकः।
धूर्तो दिगम्बरः शौरिर्हरिणः पाण्डु-लोचनः ॥8॥

प्रशान्तः शान्तिदः शुद्धः शंकर-प्रिय-बान्धवः।
अष्ट-मूर्तिर्निधीशश्च, ज्ञान-चक्षुस्तपो-मयः ॥9॥

अष्टाधारः षडाधारः, सर्प-युक्तः शिखी-सखः।
भूधरो भूधराधीशो, भूपतिर्भूधरात्मजः ॥10॥

कपाल-धारी मुण्डी च, नाग-यज्ञोपवीत-वान्।
जृम्भणो मोहनः स्तम्भी, मारणः क्षोभणस्तथा ॥11॥

शुद्द-नीलाञ्जन-प्रख्य-देहः मुण्ड-विभूषणः।
बलि-भुग्बलि-भुङ्-नाथो, बालोबाल-पराक्रम ॥12॥

सर्वापत्-तारणो दुर्गो, दुष्ट-भूत-निषेवितः।
कामीकला-निधिःकान्तः, कामिनी-वश-कृद्वशी ॥13॥

जगद्-रक्षा-करोऽनन्तो, माया-मन्त्रौषधी-मयः।
सर्व-सिद्धि-प्रदो वैद्यः, प्रभ-विष्णुरितीव हि ॥14॥

यह भी पढ़े ~ चार वेद की संपूर्ण जानकारी और महत्व, संक्षिप्त परिचय

॥ फल-श्रुति ॥

अष्टोत्तर-शतं नाम्नां, भैरवस्य महात्मनः।
मया ते कथितं देवि, रहस्य सर्व-कामदम् ॥15॥

य इदं पठते स्तोत्रं, नामाष्ट-शतमुत्तमम्।
न तस्य दुरितं किञ्चिन्न च भूत-भयं तथा ॥16॥

न शत्रुभ्यो भयं किञ्चित्, प्राप्नुयान्मानवः क्वचिद्।
पातकेभ्यो भयं नैव, पठेत् स्तोत्रमतः सुधीः ॥17॥

मारी-भये राज-भये, तथा चौराग्निजे भये।
औत्पातिके भये चैव, तथा दुःस्वप्नजे भये ॥18॥

बन्धने च महाघोरे, पठेत् स्तोत्रमनन्य-धीः।
सर्वं प्रशममायाति, भयं भैरव-कीर्तनात् ॥19॥

 

॥ क्षमा-प्रार्थना ॥

आवाहनङ न जानामि, न जानामि विसर्जनम्।
पूजा-कर्म न जानामि, क्षमस्व परमेश्वर ॥

मन्त्र-हीनं क्रिया-हीनं, भक्ति-हीनं सुरेश्वर।
मया यत्-पूजितं देव परिपूर्णं तदस्तु मे ॥

इति बटुक भैरव स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

यह भी पढ़े

वैदिक सूक्त संग्रह हिंदी में

ब्रह्म संहिता हिंदी में

ऋग्वेद हिंदी में

108-उपनिषद हिंदी में

विदुर नीति

राघवयादवीयम्

विविध चिकित्सा हिंदी में

Share
0

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share
Share